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मिडिल ईस्ट क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। इसी माहौल के बीच बाजार में सूचीबद्ध हुई एक नई कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। कंपनी के शेयर बाजार में आते ही लगभग 35 प्रतिशत तक गिर गए, जिससे निवेशकों को पहले ही दिन नुकसान उठाना पड़ा।
सोमवार को बाजार में सूचीबद्ध हुई सूती धागा बनाने वाली कंपनी के शेयरों की शुरुआत बेहद कमजोर रही। निवेशकों को उम्मीद थी कि लिस्टिंग के समय शेयरों में कम से कम स्थिरता दिखाई देगी, लेकिन शुरुआती कारोबार में ही कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। शेयर बाजार में प्रवेश करते ही कंपनी के शेयर निर्गम मूल्य से काफी नीचे पहुंच गए।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना तनावपूर्ण माहौल है। मिडिल ईस्ट क्षेत्र में जारी संघर्ष ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। ऐसे हालात में निवेशक जोखिम भरे निवेश से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका असर नई कंपनियों के शेयरों पर ज्यादा दिखाई देता है।
कंपनी के शेयरों ने सूचीबद्ध होते ही कमजोर संकेत दिए और शुरुआती कारोबार में कीमतें लगातार दबाव में रहीं। इससे उन निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ जिन्होंने आईपीओ के दौरान शेयर खरीदे थे और बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर रहे थे। कई निवेशकों को उम्मीद थी कि शेयर कम से कम निर्गम मूल्य के आसपास सूचीबद्ध होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
बाजार के जानकारों के अनुसार अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ जाता है। ऐसे समय में नई कंपनियों के शेयरों में निवेश को जोखिम भरा माना जाता है। यही कारण है कि इस आईपीओ को सूचीबद्ध होते ही बिकवाली का सामना करना पड़ा।
ग्रे मार्केट के संकेत भी पहले से बहुत मजबूत नहीं थे। बाजार में सूचीबद्ध होने से पहले ही इस कंपनी के शेयरों को लेकर उत्साह सीमित था। कई निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया था, लेकिन इसके बावजूद गिरावट उम्मीद से ज्यादा रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का असर अक्सर शेयर बाजार पर तेजी से दिखाई देता है। खासतौर पर युद्ध या राजनीतिक तनाव जैसी परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर झुकते हैं। इसका सीधा असर इक्विटी बाजार पर पड़ता है।
हाल के दिनों में वैश्विक बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर असर पड़ने की आशंका से निवेशकों में चिंता बढ़ी हुई है। इससे पूंजी बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।
नई सूचीबद्ध कंपनियों के लिए स्थिर बाजार परिस्थितियां बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यदि लिस्टिंग के समय बाजार अस्थिर हो तो कंपनियों को उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन करना मुश्किल हो जाता है। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी कंपनी के शेयर का शुरुआती प्रदर्शन हमेशा उसके दीर्घकालिक भविष्य को तय नहीं करता। यदि कंपनी का कारोबार मजबूत रहता है और वित्तीय स्थिति स्थिर रहती है तो समय के साथ शेयरों में सुधार संभव है।
निवेश सलाहकारों ने निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
निवेशकों के लिए यह घटना एक सीख के रूप में भी देखी जा रही है कि शेयर बाजार में निवेश करते समय केवल लिस्टिंग लाभ की उम्मीद पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। बाजार की परिस्थितियों और कंपनी की बुनियादी स्थिति दोनों का ध्यान रखना जरूरी है।
फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने की जरूरत है।
इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक तनाव का असर स्थानीय बाजारों पर भी तेज़ी से पड़ता है और निवेशकों को ऐसे जोखिमों के प्रति हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
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