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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का धारावी इलाका इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में है। यहां की तंग गलियां और सीमित संसाधनों में जीवन गुजारते लोगों की जिंदगी अब विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती जा रही है। दो घंटे की एक विशेष यात्रा के लिए विदेशी पर्यटकों से हजारों रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जिससे यहां एक नया तरह का पर्यटन बाजार विकसित हो गया है।
धारावी को दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में गिना जाता है। यहां लाखों लोग सीमित संसाधनों के बीच अपना जीवन बिताते हैं। यही परिस्थितियां अब विदेशी पर्यटकों के लिए एक अनुभव का विषय बन गई हैं। कई टूर ऑपरेटर पर्यटकों को धारावी की गलियों में घुमाते हैं और वहां की जीवन शैली से परिचित कराते हैं।
जानकारी के अनुसार विदेशी पर्यटक लगभग दो घंटे के इस दौरे के लिए करीब 15 हजार रुपये तक भुगतान करते हैं। वहीं भारतीय पर्यटकों के लिए शुल्क अपेक्षाकृत कम रखा जाता है, जो लगभग 1500 रुपये से 7000 रुपये तक हो सकता है। इस अंतर के कारण भी यह पर्यटन मॉडल चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह दौरा आम तौर पर छोटे समूहों में कराया जाता है। गाइड पर्यटकों को धारावी के अलग-अलग हिस्सों में ले जाकर वहां के उद्योग, घरों की संरचना और लोगों की दिनचर्या के बारे में जानकारी देते हैं। कई जगहों पर छोटे पैमाने के उद्योग चलते हैं, जिनमें प्लास्टिक रीसाइक्लिंग, चमड़ा उद्योग, कपड़ा सिलाई और अन्य काम शामिल हैं। इन गतिविधियों को भी पर्यटकों को दिखाया जाता है।
हालांकि इस तरह के पर्यटन को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक मानते हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि यह गरीबी को एक तमाशे के रूप में प्रस्तुत करता है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के दौरे में लोगों की निजी जिंदगी को प्रदर्शन का हिस्सा बना दिया जाता है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया भी मिश्रित है। कुछ निवासी इसे रोजगार का एक साधन मानते हैं, क्योंकि इससे गाइड, परिवहन और अन्य सेवाओं के जरिए आय के अवसर पैदा होते हैं। वहीं कुछ लोग अपने निजी जीवन में हस्तक्षेप को लेकर असहज महसूस करते हैं और पर्यटकों द्वारा फोटो या वीडियो बनाए जाने का विरोध करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह के पर्यटन को संवेदनशील तरीके से संचालित किया जाए तो यह सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। पर्यटकों को केवल गरीबी दिखाने के बजाय यहां के लोगों की मेहनत और उद्यमशीलता को भी सामने लाना जरूरी है।
धारावी में कई छोटे उद्योग वर्षों से चल रहे हैं, जो स्थानीय लोगों की आय का प्रमुख स्रोत हैं। टूर के दौरान पर्यटकों को यह भी बताया जाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के लोग किस तरह छोटे स्तर पर व्यवसाय चलाकर अपनी आजीविका कमा रहे हैं। इससे पर्यटक इस क्षेत्र को केवल गरीबी के नजरिए से नहीं बल्कि एक सक्रिय आर्थिक इकाई के रूप में भी देख पाते हैं।
कुछ पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भ्रमण से विदेशी पर्यटकों को विकासशील देशों की सामाजिक वास्तविकताओं को समझने का अवसर मिलता है। वहीं आलोचकों का कहना है कि गरीबी को अनुभव के रूप में बेचना नैतिक रूप से सही नहीं माना जा सकता।
समय के साथ यह पर्यटन मॉडल अधिक संगठित होता जा रहा है। कई कंपनियां पेशेवर तरीके से इस तरह के दौरे आयोजित कर रही हैं। पर्यटकों को सुरक्षा, गाइड और निर्धारित मार्ग के साथ भ्रमण कराया जाता है।
हालांकि इस पूरे मॉडल के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या इस पर्यटन से स्थानीय लोगों को पर्याप्त लाभ मिल रहा है या नहीं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पर्यटन से होने वाली आय का एक हिस्सा स्थानीय विकास पर खर्च होना चाहिए।
धारावी का यह बदलता स्वरूप बताता है कि महानगरों में पर्यटन के नए रूप सामने आ रहे हैं। जहां एक तरफ चमकती इमारतें और आधुनिक जीवनशैली आकर्षण का केंद्र हैं, वहीं दूसरी ओर संघर्षपूर्ण जीवन भी पर्यटकों के लिए जिज्ञासा का विषय बनता जा रहा है।
भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस तरह का पर्यटन किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या यह स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर पाता है या नहीं। फिलहाल धारावी का यह अनोखा पर्यटन मॉडल देश और विदेश दोनों जगह चर्चा का विषय बना हुआ है।
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